ब्यूरो चीफ की खास खबर माल से

माल, लखनऊ। माल क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को लेकर जन सहायता एवं पत्रकार कल्याण फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने मोर्चा खोलते हुए खंड शिक्षा अधिकारी को 15-सूत्रीय जनहित ज्ञापन सौंपा। संगठन ने सरकारी विद्यालयों की जमीनी स्थिति, विद्यार्थियों की सुरक्षा और अभिभावकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में आरोपों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर कई सरकारी विद्यालयों के जर्जर भवन, शिक्षकों की समय से उपस्थिति, नियमित शिक्षण कार्य, मूलभूत सुविधाओं तथा विद्यार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय से नहीं मिलने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास सैनी ने कहा कि मामला केवल स्कूल की इमारत का नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा से जुड़ा है। यदि किसी विद्यालय का भवन जर्जर है तो उसका तकनीकी निरीक्षण कराकर आवश्यक मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाना चाहिए।
निजी स्कूलों पर भी उठे सवाल
ज्ञापन में निजी विद्यालयों से जुड़ी अभिभावकों की शिकायतों को भी शामिल किया गया है। इनमें प्रवेश एवं अन्य शुल्क, किताब-कॉपी व ड्रेस किसी विशेष दुकान से लेने का कथित दबाव, TC अथवा छात्र संबंधी दस्तावेजों में देरी जैसे मामलों की जांच की मांग की गई है।
इसके साथ ही स्कूल बस और वैन की फिटनेस, परमिट, चालक का लाइसेंस, निर्धारित क्षमता और बच्चों की सुरक्षा की नियमित जांच कराने की मांग भी उठाई गई है।
“सवाल शिक्षा व्यवस्था का है, किसी व्यक्ति विशेष का नहीं”
फाउंडेशन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी अधिकारी, शिक्षक या विद्यालय को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
संगठन ने विभाग से मांग की है कि प्रत्येक शिकायत की जांच कर 15 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई और प्रगति की लिखित जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
15 दिन बाद आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित 15 दिनों में समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस एवं संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है, तो संगठन विद्यार्थियों, अभिभावकों और नागरिकों के हित में नियमानुसार शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक धरना-प्रदर्शन/जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
विकास सैनी ने कहा—
“हमारा उद्देश्य टकराव नहीं, समाधान है। लेकिन बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े सवालों पर चुप नहीं बैठेंगे। विभाग समस्याओं की जांच करे और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करे।”
अब देखना होगा कि माल क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इन सवालों पर शिक्षा विभाग क्या कार्रवाई करता है और 15 दिनों के भीतर कितनी समस्याओं का समाधान हो पाता है।

