सरकार द्वारा बनाए जा रहे दबाव से नहीं घबराने वाले बैंक कर्मी

अनुराग सिंह की खास खबर लखनऊ से
लखनऊ। केंद्र सरकार बैंक कर्मियों की 5 दिवसीय बैंकिंग व लंबित मांगों को पूरा करने के बजाए उन्हें डराने व धमकाने का प्रयास कर रही है, पर वे सरकार के इन कृत्यों से घबराने वाले नही हैं। सभी बैंककर्मी (75% से अधिक जेन जी) अपनी मांगों के पूरा होने तक संघर्ष करने को संकल्पित हैं।
कल रविवार को बैंक खोलने कारण उत्पन्न हुए भ्रम को स्पष्ट करते हुए फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया पहले रिजर्व बैंक के अनुमोदन पर भारतीय बैंक संघ ने रविवार 27 सितम्बर को कार्य दिवस घोषित किया था, जिसका यूनाइटेड फोरम ने विरोध किया कि बैंकों के द्विपक्षीय समझौते के अंतर्गत रविवार अवकाश का दिन है और उसे कार्य दिवस नहीं बनाया जा सकता।
रिजर्व बैंक को ये अधिकार जरूर है कि वो आपातकालीन परिस्थितियों में रविवार तथा अन्य घोषित छुट्टियों में भी बैंक खोल सकता है। उस दिन कार्यालय आदेश कर के बुलाए जाने वाले कर्मचारियों को 200% कि दर से ओवरटाइम का भुगतान करना होगा। इसी प्रकार अधिकारियों को आगे किसी दिन अवकाश या डिस्कंफर्ट भत्ता देना होगा।
फोरम के विरोध के फलस्वरूप बैंक प्रबंधन ने अपने हिटलरशाही आदेश को वापस लेकर द्विपक्षीय समझौते के प्राविधानों के अनुसार ही बैंक खोलने का निर्णय किया है अर्थात अब जो भी अधिकारी और कर्मचारी रविवार को बैंक बुलाये जाएंगे, उन्हें ओवरटाइम या डिस्कंफर्ट भत्ते का भुगतान करना होगा ।
अनिल तिवारी मीडिया प्रभारी ने बताया फोरम द्वारा 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल आहूत की गई है तथा मांगे पूरी न होने पर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल घोषित की गई है।

