राकेश कुमार की खास खबर लखनऊ से

लखनऊ। जन सहायता एवं पत्रकार कल्याण फाउंडेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास सैनी ने अपनी टीम के साथ प्रभागीय वनाधिकारी, लखनऊ कार्यालय में एसडीओ अर्चना को 7 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर वन विभाग से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में मुख्य रूप से ये 7 प्रमुख मांगें रखी गईं—
- अवैध कटान पर कार्रवाई का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।
पिछले एक वर्ष में दुबग्गा एवं मलिहाबाद वन क्षेत्र में अवैध कटान के कितने मामले सामने आए, कितने मामलों में कार्रवाई हुई, कितनी लकड़ी जब्त की गई तथा किन मामलों में कार्रवाई लंबित है—इसका विवरण उपलब्ध कराया जाए। - आम के कलमी पेड़ों की कटान और टीपी की जांच।
पिछले एक वर्ष में आम के कलमी पेड़ों की कटान के लिए जारी आदेशों और टीपी (ट्रांजिट परमिट) की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कितने आदेश जारी हुए, कितनी लकड़ी का विवरण दर्ज है और लकड़ी को किस स्थान से किस स्थान तक ले जाने की अनुमति दी गई। - आरा मशीनों की जांच एवं अभिलेखों का सत्यापन।
दुबग्गा वन क्षेत्र में संचालित आरा मशीनों की जांच कर पिछले एक वर्ष में आने वाली आम की लकड़ी के स्रोत, टीपी, परिवहन प्रपत्र एवं अन्य वैध दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए। - वृक्षारोपण की गांववार जांच।
पिछले वर्षों में वन विभाग द्वारा किन-किन गांवों में वृक्षारोपण कराया गया, कितने पौधे लगाए गए और वर्तमान में कितने पौधे जीवित हैं—इसका गांववार भौतिक सत्यापन कराया जाए। - वृक्षारोपण पर खर्च सरकारी धनराशि का विवरण।
प्रत्येक गांव में वृक्षारोपण के लिए स्वीकृत धनराशि, पौधों की खरीद, परिवहन, रोपण एवं रखरखाव पर हुए खर्च का वर्षवार एवं गांववार विवरण उपलब्ध कराया जाए। - संबंधित अभिलेख एवं डेटा सार्वजनिक किए जाएं।
वृक्षारोपण, पेड़ कटान, टीपी, भुगतान, पौध खरीद, रखरखाव, कटान आदेश एवं कार्रवाई से संबंधित अभिलेखों को नियमानुसार सार्वजनिक किया जाए, ताकि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। - समयबद्ध निष्पक्ष जांच एवं कार्रवाई की जाए।
उपरोक्त सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कर 15 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट एवं की गई कार्रवाई का विवरण उपलब्ध कराया जाए। यदि निर्धारित समय में उचित जांच एवं कार्रवाई नहीं होती है, तो संगठन द्वारा लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आगे के जनहित कार्यक्रम किए जाएंगे।
विकास सैनी ने कहा—
“यह पहल किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सरकारी धन की जवाबदेही और वन विभाग के कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है। हमारा उद्देश्य है कि जंगल और सरकारी संसाधनों की सुरक्षा के साथ जनता को सही जानकारी और व्यवस्था को जवाबदेही मिले।”

