सोनेंद्र कुमार

लखनऊ की एक अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में राज्य बनाम कैलाश (अपराध संख्या 108/2025) मामले में अभियुक्त कैलाश को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। इस मामले की सबसे बड़ी विशेषता बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजीत प्रताप सिंह यादव की प्रभावी और तेज-तर्रार पैरवी रही, जिनके सटीक तर्कों के दम पर महज छह महीने के भीतर ट्रायल पूरा हुआ और अभियुक्त को न्याय मिला। क्या था मामला और क्यों थी चुनौती?
निगोहां थाना क्षेत्र के इस मामले में कैलाश पर अपनी ही मां सुंदरा देवी के साथ मारपीट करने और अपनी 10 वर्षीय बेटी के प्रति गंभीर आरोपों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। कैलाश पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 352, 351(2), 110, 74 और पाक्सो एक्ट की धारा 9 व 10 जैसी अत्यंत गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। पिछले वर्ष जून 2025 से कैलाश जिला कारागार में बंद था।
अधिवक्ता की जीत: साक्ष्यों के अभाव में ढहे आरोप
इस जटिल मामले में बचाव पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता अजीत प्रताप सिंह यादव ने अदालत के समक्ष बेहद मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों की कमजोरियों को उजागर किया और अदालत को यह समझाने में सफल रहे कि ये आरोप निराधार हैं।
अधिवक्ता अजीत प्रताप सिंह यादव की मेहनत का ही परिणाम था कि:
अदालत ने अभियोजन पक्ष के आरोपों को संदेहास्पद माना।
साक्ष्यों के अभाव में कैलाश को निर्दोष करार देते हुए दोषमुक्त किया।मात्र छह महीने के भीतर कानून की जटिल प्रक्रिया को पूरा करवाकर उसे जेल से मुक्ति दिलाई। न्याय की जीत
अदालत के इस फैसले के बाद अब कैलाश फिर से अपनी स्वतंत्रता के साथ सामान्य जीवन जीने के लिए तैयार है। एक ओर जहाँ पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में ट्रायल लंबा खिंचता है, वहीं अधिवक्ता अजीत प्रताप सिंह यादव द्वारा महज छह महीने में इसे पूर्ण कराकर अपने मुवक्किल को निर्दोष सिद्ध करना, उनकी कानूनी दक्षता और प्रभावी पैरवी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

