सोनेंद्र कुमार

लखनऊ। मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र अंतर्गत आने वाली अनेक ग्राम पंचायतों में गाँव की सुरक्षित भूमि खलिहान, पशुचर, खेल का मैदान,कब्रिस्तान, ऊसर बंजर भूमि,खाद के गड्ढे, सुअर पालन, चमडा़ निकालने का स्थान, गाँव के चिन्हित पुराने तालाब,सहित अनेक प्रकार की भूमि पर कब्जेदारी के चलते ऐसी भूमि का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। मोहन लाल गंज तहसील क्षेत्र के किसी भी ग्राम पंचायत में इसका सत्यापन किया जा सकता है। सुरक्षित भूमि की देखरेख के लिए नियुक्त राजस्व कर्मी भी ऐसे कब्जेदारों से संपर्क कर अपनी जेब गरम करने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल कर अपने कर्तव्यों की इति श्री कर लेते हैं। प्रदेश सरकार जहाँ ऐसे कब्जेदारों से भूमि को मुक्त कराने का निर्देश राजस्व विभाग के आला अधिकारियों को देती रहती है किंतु धन लोलुपता के आकंठ में डूबे राजस्व कर्मी किसी भी अबैध कब्जेदार के विरुद्ध कार्यवाही नहीं करते हैं। जिसके चलते गाँव की वेशकीमत भूमि पर दबंगों या भूमाफियाओं का कब्जा होता जा रहा है।और राजस्व कर्मी तमाशाई बने आंख बंद किए हुए हैं।ग्राम पंचायत नदौली, भद्दी खेड़ा,दयालपुर, रघुनाथ खेड़ा, उतरांवां, मस्ती पुर, उदयपुर, पतौना, गोतम खेड़ा,जबरौली, कमाल पुर बिचिलका, भावाखेडा़, कुशमौरा,शेरपुर लवल बेनीगंज मांगटईया में ग्राम पंचायत की सुरक्षित भूमि खलिहान एवं पशुचर भूमि पर अवैध कबजेदारी के चलते गांव के किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । बताया जाता है कि इन ग्राम पंचायतों में अकेले शैरपुर मे लवल कई बीघा भूमि पर गांव के ही प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर लिया है। जिसके चलते राजस्व की करोड़ों की संपत्ति का नुकसान राजस्व विभाग को हो रहा है । किंतु इस भूमि की सुरक्षा के लिए नियुक्त राजस्व विभाग कर्मी लेखपाल भी ऐसे लोगों से मिलकर भूमि पर कब्जा कराने में ही अपनी रुचि रखते हैं। बताया जाता है कि इस ग्राम पंचायत में पशुचर एवं खेल का मैदान तथा खलिहान ऊसर बंजर सहित अनेक प्रकार की कीमती भूमि पर गांव के ही प्रभाव शाली लोगों का कब्जा बरकरार है। जिसके चलते गांव के गरीब एवं असहाय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । जबकि वास्तविकता यह है कि ऐसे लोग ही गांव की वेशकीमती भूमि पर कब्जा किए हुए हैं। जिससे उनको डर सताने लगता है कि कहीं ऐसा ना हो कि उनके द्वारा कब्जाई गई जमीन ग्राम वासियों एवं बिना भूमि वाले लोगों को ना दे दी जाए। गांव के कई लोगों ने दबी जुबान से बताया की अधिकांश भूमि पर गांव के प्रभाव शाली लोगों का कब्जा है जिससे चाहकर भी वह कोई विरोध नहीं कर पाते हैं।

