ब्यूरो चीफ की खास खबर मुजफ्फरनगर से

मुजफ्फरनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट रवि कुमार दिवाकर ने सोमवार को हत्या के एक और मामले में दोषी को फांसी की सजा सुनाने के दौरान इस्तीफा देने की चेतावनी दी है।
एक फैसला सुनाते हुए बोले जज रवि कुमार दिवाकर ने कहा।
मेरी कोर्ट से गंभीर मामले वापस लिए गए,
मैं इस फैसले से बहुत आहत और दुखी हूं.
ऐसा गैंगस्टर, माफिया को बचाने के लिए किया,
‘मैं कायर जज कहलाने के बजाय मरना पसंद करूंगा’।
न्यायाधीश ने अपने 77 पन्ने के आदेश में उनके न्यायालय से लूट व हत्या की 100 पत्रावलियां वापस करने पर दुख प्रकट किया है।
उन्होंने निर्णय में लिखा कि वर्तमान समय में वे कुछ व्यवहार से बहुत आहत और दुखी हैं, वे अपने व्यक्तिगत विचार व्यक्त करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं।
न्यायाधीश ने कहा कि पत्रावलियां वापस होने पर पश्चिमी उत्तर-प्रदेश के माफिया ने उन्हें संदेश भिजवाया था।
कि अभी तो सिर्फ पत्रावलियां वापस हुई हैं, अगर हमारे पीछे पड़े या कोई टिप्पणी की तो वह उनकी कोर्ट चेंज करवा देंगे या उनका जिले से बाहर ट्रांसफर करा देंगे.
न्यायाधीश ने लिखा कि यदि मैं माफिया, बाहुबलियों, अपराधियों से भयग्रस्त हुआ, तो मेरे लिए यह उचित होगा कि मैं इस पवित्र न्यायिक संस्था से त्यागपत्र दे दूं. मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नहीं. जब तक मैं अपने सिद्धांतों पर चल सकता हूं, तब तक सर्विस करूंगा अन्यथा त्यागपत्र दे दूंगा. जब तक जज की कुर्सी पर हूं तो निर्णय लेने का अधिकार भी एकमात्र मेरा ही होगा।
जनपद में लगभग नौ माह में हत्या के 10 मामलों में एक महिला समेत 23 लोगों को फांसी की सजा सुनाने वाले अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर से 18 अगस्त को तत्कालीन जिला जज बीरेन्द्र कुमार सिंह ने लूट व हत्या की विचाराधीन 100 पत्रावलियां वापस ले ली थीं. इन पत्रावलियों की सुनवाई सत्र न्यायालय में करने के आदेश दिए थे. इनमें रुड़की के कुख्यात बदमाश चैनू पंडित की पत्रावली भी शामिल थी।
